उनके पास अतीत का गौरव गान है और युद्ध की गाथाएं भी लेकिन राजस्थान की चुनावी लड़ाई में राजपूत समाज सियासत में अपनी पारंपरिक पसंद बीजेपी से रूठा-रूठा नज़र आता है. हालांकि कांग्रेस से भी ख़ुश नहीं हैं.
राजपूत संगठनों का कहना है कि सत्तारूढ़ बीजेपी ने बहुत निराश किया है. इसका चुनाव में असर होगा. मगर बीजेपी का दावा है कि समाज पहले की तरह बीजेपी के साथ है.
इस चुनावी घमासान में राजपूत समाज के सदस्य कहीं असमंजस और अनिर्णय की स्थिति में हैं तो कहीं वे पार्टियों के ख़िलाफ़ स्वर मुखरित करते मिलते हैं.
इतिहासकार प्रोफ़ेसर आरएस खंगारोत कहते है, "लोग कंफ्यूज हैं, यह एक ऐसा समाज है जिसके बारे में कहा जाता है कि आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखता है. वे सियासी पार्टियों से खिन्न हैं, क्योंकि ये पार्टियां समाज की अपेक्षा पर खरी नहीं उतरीं. नेतृत्व के स्तर पर शून्यता है और इसकी वजह से कई गुट खड़े हो गए. बीजेपी को इसका अहसास रहा होगा. इसीलिए बीजेपी ने इन चुनावों में राजपूत समाज के 26 लोगों को उम्मीदवारी दी है जबकि कांग्रेस ने राजपूत समाज के एक दर्जन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. पर शायद यह काफ़ी नहीं था.''
प्रोफ़ेसर खंगारोत कहते हैं, ''आज़ादी के बाद राजपूत समाज को लगा कि कांग्रेस ने रियासतें ख़त्म की हैं. लिहाज़ा वे उस वक़्त मौजूद दूसरे दलों के साथ चले गए. फिर लोकतांत्रिक ढांचे में अपना स्थान बना लिया.''
जयपुर में श्री राजपूत सभा वर्ष 1939 से समाज के लिए काम कर रही है.
सभा के अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा ने बीबीसी से कहा, "बीजेपी का साथ देने का सवाल ही नहीं है. बेशक हम शुरू से इस पार्टी के साथ रहे हैं. राजपूत समाज ने कभी भी बीजेपी के अलावा सोचा नहीं. मगर अब बात कुछ और है."
छापे से भड़के राजपूत
श्री राजपूत सभा के अध्यक्ष लोटवाड़ा इसका सबब बयान करते है. वह कहते है, "बीजेपी ने हमारे कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री जसवंत सिंह का पिछले लोक सभा चुनाव में टिकट काट दिया. इससे राजपूत बहुत आहत हुए. फिर बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत भैरोंसिंह शेखावत और उनके परिवार की उपेक्षा की. फिर और भी घटनाएं हुईं जिसमें बीजेपी सरकार ने राजपूत समाज के साथ अच्छा नहीं किया."
लोटवाड़ा कहते है, "राजपूत सभा भवन को हम मंदिर मानते हैं, यह एक सामाजिक संस्था है. पुलिस ने सभा भवन पर छापे मारे, सर्विस टैक्स का छापा डलवाया गया, आप बताओ हम कैसे बीजेपी का साथ दें."
पिछले पांच साल में राजपूत समाज के लोग कभी पद्मिनी फ़िल्म को लेकर सड़कों पर निकले तो कभी किसी और मुद्दे पर मोर्चा निकालते रहे. इन विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रही श्री राजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने बीबीसी से कहा, "इन चुनावों में बीजेपी को शिकस्त देंगे. बीजेपी ने समाज की अनदेखी की है. इन मांगो में राम मंदिर निर्माण और एससी-एसटी एक्ट में बदलाव जैसी मांगें भी शामिल हैं."
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