Wednesday, November 28, 2018

बीजेपी या कांग्रेस, राजपूत किसे करेगा परास्त?

उनके पास अतीत का गौरव गान है और युद्ध की गाथाएं भी लेकिन राजस्थान की चुनावी लड़ाई में राजपूत समाज सियासत में अपनी पारंपरिक पसंद बीजेपी से रूठा-रूठा नज़र आता है. हालांकि कांग्रेस से भी ख़ुश नहीं हैं.

राजपूत संगठनों का कहना है कि सत्तारूढ़ बीजेपी ने बहुत निराश किया है. इसका चुनाव में असर होगा. मगर बीजेपी का दावा है कि समाज पहले की तरह बीजेपी के साथ है.

इस चुनावी घमासान में राजपूत समाज के सदस्य कहीं असमंजस और अनिर्णय की स्थिति में हैं तो कहीं वे पार्टियों के ख़िलाफ़ स्वर मुखरित करते मिलते हैं.

इतिहासकार प्रोफ़ेसर आरएस खंगारोत कहते है, "लोग कंफ्यूज हैं, यह एक ऐसा समाज है जिसके बारे में कहा जाता है कि आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखता है. वे सियासी पार्टियों से खिन्न हैं, क्योंकि ये पार्टियां समाज की अपेक्षा पर खरी नहीं उतरीं. नेतृत्व के स्तर पर शून्यता है और इसकी वजह से कई गुट खड़े हो गए. बीजेपी को इसका अहसास रहा होगा. इसीलिए बीजेपी ने इन चुनावों में राजपूत समाज के 26 लोगों को उम्मीदवारी दी है जबकि कांग्रेस ने राजपूत समाज के एक दर्जन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. पर शायद यह काफ़ी नहीं था.''

प्रोफ़ेसर खंगारोत कहते हैं, ''आज़ादी के बाद राजपूत समाज को लगा कि कांग्रेस ने रियासतें ख़त्म की हैं. लिहाज़ा वे उस वक़्त मौजूद दूसरे दलों के साथ चले गए. फिर लोकतांत्रिक ढांचे में अपना स्थान बना लिया.''

जयपुर में श्री राजपूत सभा वर्ष 1939 से समाज के लिए काम कर रही है.

सभा के अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा ने बीबीसी से कहा, "बीजेपी का साथ देने का सवाल ही नहीं है. बेशक हम शुरू से इस पार्टी के साथ रहे हैं. राजपूत समाज ने कभी भी बीजेपी के अलावा सोचा नहीं. मगर अब बात कुछ और है."

छापे से भड़के राजपूत
श्री राजपूत सभा के अध्यक्ष लोटवाड़ा इसका सबब बयान करते है. वह कहते है, "बीजेपी ने हमारे कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री जसवंत सिंह का पिछले लोक सभा चुनाव में टिकट काट दिया. इससे राजपूत बहुत आहत हुए. फिर बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत भैरोंसिंह शेखावत और उनके परिवार की उपेक्षा की. फिर और भी घटनाएं हुईं जिसमें बीजेपी सरकार ने राजपूत समाज के साथ अच्छा नहीं किया."

लोटवाड़ा कहते है, "राजपूत सभा भवन को हम मंदिर मानते हैं, यह एक सामाजिक संस्था है. पुलिस ने सभा भवन पर छापे मारे, सर्विस टैक्स का छापा डलवाया गया, आप बताओ हम कैसे बीजेपी का साथ दें."

पिछले पांच साल में राजपूत समाज के लोग कभी पद्मिनी फ़िल्म को लेकर सड़कों पर निकले तो कभी किसी और मुद्दे पर मोर्चा निकालते रहे. इन विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रही श्री राजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने बीबीसी से कहा, "इन चुनावों में बीजेपी को शिकस्त देंगे. बीजेपी ने समाज की अनदेखी की है. इन मांगो में राम मंदिर निर्माण और एससी-एसटी एक्ट में बदलाव जैसी मांगें भी शामिल हैं."

Monday, November 26, 2018

मां-बाप का जिक्र हुआ तो PM मोदी ने बताया- क्यों करते हैं इंदिरा-राजीव पर वार

देश में चुनाव का मौसम है. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव को सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में हो रहे चुनाव में जीत का परचम लहराने के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. इन पांच राज्यों में से तीन में बीजेपी की सरकार है तो वहीं मिजोरम में कांग्रेस तो तेलंगाना में टीआरएस का शासन रहा है.

एक तरफ कांग्रेस जहां मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में वापसी की राह देख रही है तो वहीं बीजेपी की नजर इन राज्यों में एक बार फिर सत्ता पर काबिज होने की है. कांग्रेस की ओर से जहां राहुल गांधी कमान संभाले हुए हैं तो वहीं बीजेपी की ओर से खुद पीएम मोदी मोर्चा लिए हुए हैं. दोनों ही नेता धुआंधार चुनावी रैलियां कर रहे हैं. इन रैलियों में दोनों नेता एक दूसरे पर जोरदार हमला भी कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता अपने बयान से पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर देते हैं, जिसके बचाव में कांग्रेस अध्यक्ष को खुद सामने आना पड़ता है.

एक ओर जहां अब तक चुनाव के दौरान भ्रष्टाचार, अपराध, विकास, बेरोजगारी पर नेता बयान देते थे, तो वहीं अब नेताओं के बोल विरोधियों के माता-पिता तक पहुंच गए हैं.

कांग्रेसी नेता ने पीएम मोदी के पिता को लेकर दिया बयान

दरअसल, कांग्रेस के एक नेता ने पीएम मोदी के पिता को लेकर बयान दिया. पूर्व केंद्रीय मंत्री विलासराव मुत्तेवार ने पीएम मोदी को लेकर कहा था कि जिस प्रधानमंत्री मोदी के पिता का नाम किसी को पता नहीं है, वो मोदी राहुल गांधी से हिसाब मांगते हैं, जबकि एक राहुल गांधी हैं जिसकी पीढ़ियों के बारे में सबको पता है.

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी जो राहुल गांधी से भिड़ रहे हैं, नरेन्द्र मोदी को पीएम बनने से पहले कौन जानता था. आज भी पीएम नरेंद्र मोदी के बाप का नाम कोई नहीं जानता है, लेकिन राहुल गांधी के बाप का नाम तो क्या पीढ़ियों का नाम तक सभी को पता है और जिसके बाप का नाम पता नहीं वो प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी से हिसाब मांग रहे हैं. किस बात का हिसाब मांग रहे हैं.

हालांकि खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कभी पीएम मोदी के माता-पिता पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके नेता जिस तरह से बयान दे रहे हैं वो उनके लिए मुसीबत खड़ी कर दे रहे हैं.

'पीएम मोदी ने किया पलटवार'

पीएम मोदी भी कांग्रेस के इस नेता पर पलटवार करने में देरी नहीं की. उन्होंने मध्य प्रदेश के विदिशा में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे पिता जिनका 30 साल पहले ही निधन हो चुका है, ऐसा क्या कारण है कि वे मेरे माता-पिता को इसमें घसीट रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि मैं किसी के परिवार के बारे में बयान नहीं देता, लेकिन मैं पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ बोल रहा हूं. अगर मेरे माता-पिता राजनीति में होते तो कांग्रेसियों को उन पर बोलने का हक था.

आपको बता दें कि पीएम इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की बात कर रहे थे. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नानी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी देश के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

'रुपया पीएम मोदी की मां की उम्र से नीचे आ पहुंचा'

इससे पहले कांग्रेस सांसद राज बब्बर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरते रुपए से पीएम मोदी की मां हीराबेन मोदी की उम्र कराई थी. एक रैली में उन्होंने कहा था कि आज रुपया पीएम मोदी की मां की उम्र से नीचे आ पहुंचा है.

Wednesday, November 7, 2018

富翁的成功哲学与邓文迪的榜样

与此案不相关的邓文迪被扯进来,引起更多的议论。有人为邓文迪鸣不平,认为她比一般傍大款的女孩强太多,是主宰自己命运的女强人。

在中文媒体的讨论中,邓文迪往往被当作女性学习的榜样,职业女性成功和励志的标志。许多人认为邓文迪出自中国普通人家,通过自己的刻苦努力,成为具有影响力的国际人物,值得年轻女性学习。

中国媒体刊登邓文迪过去的同学回忆她当初如何凌晨起床学英语,还有主流媒体刊文说中国女性应该如何学习邓文迪“旺夫”。还有网文谈“邓文迪女王启示录”之类的内容。

邓文迪再涉间谍嫌疑 卷入华盛顿政治漩涡
刘强东涉“一级强奸”:指控持续将冲击京东
京东称刘强东已回中国 性侵案备受关注的背后

但也有评论说,不可否认,邓文迪极其精明,而且野心勃勃,能够主动掌握自己的命运,她非同寻常的社交能力值得学习,但其商业投资业绩却可圈可点,不能算有多成功。

女强人形象
邓文迪是媒体大亨默多克的前妻。在中国出生平民家庭的邓文迪在1980年代后期大学毕业后出国去美国求学谋职,后来几经周折到了香港从事媒体工作

据说在1997年左右她在香港结识了所在公司的大老板默多克。两年后两人结婚。此后邓文迪的事业,投资,以及作为社会名流的生活都受到国际媒体和中国媒体的关注。

2011年默多克身陷世界新闻报电话窃听丑闻在英国议会作证时,有示威者进入会场拿蛋糕袭击默多克,坐在默多克身后的邓文迪一跃而起,迅速挡击示威者。这件事一时成为英语媒体报道的头条,许多报道对邓文迪漂亮的排球扣球动作津津乐道。

2013年邓文迪同默多克已经协议离婚。当似乎默多克接受媒体访问说,他们离异的重要原因是邓文迪和英国前首相布莱尔之间的“亲密关系”。但布莱尔否认与邓文迪有情人关系

बुलंदशहर तक कहाँ से पहुँचे गायों के कंकाल?: ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पिछले तीन दिनों से कथित गोहत्या के बाद हुई हिंसा को लेकर तनाव बना हुआ है. हिंसा में एक पुलिस अफ़सर और एक स्थ...